बाघल टुडे (अर्की):- रोहड़ चिड़गांब थाना के अंतर्गत आने वाले लिम्बड़ा गांव में एक अमानवीय घटना घटी है,जिसने पूरे समाज को अंदर तक झकजोर दिया है। अर्की विधानसभा क्षेत्र से आम आदमी पार्टी से पूर्व प्रवक्ता अशोक चंदेल ने कहा कि लगभग 12 वर्ष का एक बच्चा स्थानीय राजपूत परिवार के घर चला गया, जिसे पकड़कर निचले पशु शाला में बंद कर दिया गया और बाहर से ताला लगा दिया गया। बच्चे को मेंटली टॉर्चर किया गया और कहा गया कि “तूने हमारा घर अपवित्र कर दिया है, अब शुद्धि के लिए बकरा लाना पड़ेगा।”
बच्चे के चाचा सुरेश पोंटा को फोन करके बताया गया कि आपका भतीजा हमारे घर में घुस गया है, जिसे हमने पशुशाला में बंद कर रखा है। सुरेश पोंटा ने उन्हें कहा कि बच्चे के पिता को फोन कर लो और बच्चे को ऐसे पशुशाला में अकेले बंद मत करो। लेकिन बच्चे ने गलती से जहर नुमा दवाई खा ली, जिसके कारण I.G.M.C शिमला में इलाज के चलते 17 सितंबर को रात्रि 1:30 बजे मासूम ने दम तोड़ दिया। पीड़ित परिजनों का कहना है कि बच्चे के शव को जल्दबाजी में जला दिया गया और घटना की उचित सूचना न तो मीडिया में दी गई और न ही स्थानीय स्तर पर कोई ठोस कार्रवाई हुई। लेकिन अब अदालत ने मामले को संज्ञान में लिया है और परिजनों को न्याय दिलाने की उम्मीद जगी है।उन्होंने कहा कि यह केवल एक परिवार की नहीं, बल्कि पूरे समुदाय की अस्मिता और मानवता का प्रश्न है। जातिगत भेदभाव के नाम पर मासूम जानें कब तक जाती रहेंगी? यही सवाल अब हर तरफ गूँज रहा है।

चंदेल ने कहा कि हिमाचल प्रदेश में अनुसूचित जाति समुदाय ने मांग रखी है कि घटना की निष्पक्ष व उच्च्चस्तरीय जाँच हो और दोषियों की शीघ्र गिरफ्तारी व कड़ी कार्यवाही व सजा होनी चाहिए।उन्होंने परिवार को न्याय व आर्थिक सहायता की भी मांग रखी है। साथ ही प्रदेश में जातिगत भेदभाव और तथाकथित ‘शुद्धि’ प्रथाओं पर सख्त रोक लगे।
